हिमाद्रि तुंग श्रृंग से
1931
हिमाद्रि तुंग श्रृंग सेप्रबुद्ध शुद्ध भारती—स्वयं प्रभा समुज्ज्वलास्वतन्त्रता पुकारती—
अमर्त्य वीरपुत्र हो, दृढ़-प्रतिज्ञा सोच लो,प्रशस्त पुण्य पंथ है—बढ़े चलो बढ़े चलो।
असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ,विकीर्ण दिव्य दाह-सी।सपूत मातृभूमि के—रुको न शूर साहसी!
अराति सैन्य सिन्धू में—सुवाड़वाग्नि—से जलो,प्रवीर हो जयी बनो—बढ़े चलो, बढ़े चलो।